Shunya World

Author name: shunyaworld

आत्म-खोज

अधूरा सच

क्या हम जो देखते हैं, वही सच है? हम सब मानते हैं कि जो हम देखते हैं, सुनते हैं, छूते हैं — वही सच है। पर क्या यह सच में

दीर्घ कविताएँ

सावन

इक और सावन नाच ले, इक और सावन झूम ले। जीवन का जीवन ही क्या, जीते इक उड़ता धुआँ। जाने दूर से उठा हो इक दिया, कुछ देर तो उड़ता

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