न जुस्तजू, न इंतज़ार
न जुस्तजू है किसी की, न जज़्बा है क़ायम, न यारी है किसी से, न कैद-ओ-काल का आलम। न सुरूर-ए-मय है ये, न शिकवा है ख़ुमार से, न चलते हैं
न जुस्तजू है किसी की, न जज़्बा है क़ायम, न यारी है किसी से, न कैद-ओ-काल का आलम। न सुरूर-ए-मय है ये, न शिकवा है ख़ुमार से, न चलते हैं