Shunya World

नई उड़ान

गर चाहिये कुछ ऐसा ,
जो मिला ना था अब से पहले,
तो करना कुछ ऐसा,
जो किया ना था अबसे पहले/

इक लम्हा ठहर कर ,
जब देखा इस हयाते मुकाम को,
बनाये इन ज़रिये, सलीके,
और इंतज़ाम को /

जिनको बहुत देर से और दूर से,
अपने में शामिल करता रहा,
भरने के एहतिराम से,
अपने को भरता रहा,

शायद खालीपन के खौफ से,
कुछ दुनिया के ज़ौक़ से,
अपने को अपनी इस आदत से बार
बार,
बेखौफ में करता रहा/

दिल में आलीशान महल बनाया,

सब फानी-लाफ़ानी खयालों का,
दुनिया के दिये जवाबों का
दुनिया के पूछे सवालों का/

कुछ था नहीं मेरा यहाँ ,
सिवाय जुडने के गुबार से ,
फकत इसी ख्वाइश ने मुझे ,
दबा दिया मेरे होने के भार से/

आज तक जो कुछ था मैने जोड़ा,
कभी मन से, कभी बेमन से ,
कभी जरूरत से ज्यादा,
कभी चाहत से थोड़ा,

कभी होश से ,कभी बेहोश से,
कभी नींद से ,कभी सपने से ,
कभी जरूरी, गैर-जरूरी ,
परायों और अपनो से,

जो ये दूर से पाया मैने,
जब नज़दीक से देखा,
उसी लम्हा मेरा अपना ,

खालिस, पहला ख्याल था,
जो खुद एक जवाब था
और खुद ज़िंदगी को सवाल था /

दुल्हन सा खूबसूरत ये ख्याल है,
इसके हुमसफर का सफर ज़िंदगी का गुलाल है,
ये मंज़िल है हक़ीक़त पर्दाफरोश की,
ना फानी है या लाफ़ानी है,

है फ़क़त आज़ाद होश की,
चुके तभी जब दुनिया से बहले
दुनिया की सुनी और दुनिया को
कहले /

लेकिन जिसे चाहिये कुछ ऐसा
जो मिला ना था अबसे पेहले
तो करना कुछ ऐसा
जो किया ना था अबसे पेहले

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